स्त्री पर्व  अध्याय १७

वैशम्पाय़न उवाच

नूनमेषा पुरा वाला जीवमाने महाभुजे |  २४   क
भुजावाश्रित्य रमते सुभुजस्य मनस्विनी ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति