आदि पर्व  अध्याय ४२

सूत उवाच

ततो नाम स कन्याय़ाः पप्रच्छ भृगुनन्दन |  २०   क
वासुके भरणं चास्या न कुर्यामित्युवाच ह ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति