आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ७७

वैशम्पाय़न उवाच

दुःशला चापि तान्योधान्निवार्य महतो रणात् |  ४२   क
सम्पूज्य पार्थं प्रय़यौ गृहान्प्रति शुभानना ||  ४२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति