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शान्ति पर्व
अध्याय १६१
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वैशम्पाय़न उवाच
प्राज्ञः सुहृच्चन्दनसारलिप्तो; विचित्रमाल्याभरणैरुपेतः |  ३९   क
ततो वचः सङ्ग्रहविग्रहेण; प्रोक्त्वा यवीय़ान्विरराम भीमः ||  ३९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति