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शान्ति पर्व
अध्याय २३७
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व्यास उवाच
उत्तान आस्येन हविर्जुहोति; लोकस्य नाभिर्जगतः प्रतिष्ठा |  २७   क
तस्याङ्गमङ्गानि कृताकृतं च; वैश्वानरः सर्वमेव प्रपेदे ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति