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शान्ति पर्व
अध्याय १६१
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वैशम्पाय़न उवाच
धर्मेणैवर्षय़स्तीर्णा धर्मे लोकाः प्रतिष्ठिताः |  ७   क
धर्मेण देवा दिविगा धर्मे चार्थः समाहितः ||  ७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति