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द्रोण पर्व
अध्याय १६१
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सञ्जय़ उवाच
ततस्तु द्रुपदः क्रोधाच्छरवर्षमवाकिरत् |  ३३   क
द्रोणं प्रति महाराज विराटश्चैव संय़ुगे ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति