शान्ति पर्व  अध्याय १६२

युधिष्ठिर उवाच

पितामह महाप्राज्ञ कुरूणां कीर्तिवर्धन |  १   क
प्रश्नं कञ्चित्प्रवक्ष्यामि तन्मे व्याख्यातुमर्हसि ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति