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उद्योग पर्व
अध्याय १२२
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वैशम्पाय़न उवाच
तद्धितं च प्रिय़ं चैव धृतराष्ट्रस्य धीमतः |  १४   क
पितामहस्य द्रोणस्य विदुरस्य महामतेः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति