शान्ति पर्व  अध्याय ४९

वासुदेव उवाच

ददाह पृथिवीं सर्वां सप्तद्वीपां सपत्तनाम् |  ३१   क
स्ववाह्वस्त्रवलेनाजौ धर्मेण परमेण च ||  ३१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति