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शान्ति पर्व
अध्याय १६२
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भीष्म उवाच
तत्र दस्युर्धनय़ुतः सर्ववर्णविशेषवित् |  ३०   क
व्रह्मण्यः सत्यसन्धश्च दाने च निरतोऽभवत् ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति