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शान्ति पर्व
अध्याय १६२
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भीष्म उवाच
विनीतो निय़ताहारो व्रह्मण्यो वेदपारगः |  ३९   क
सव्रह्मचारी तद्देश्यः सखा तस्यैव सुप्रिय़म् |  ३९   ख
तं दस्युग्राममगमद्यत्रासौ गौतमोऽभवत् ||  ३९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति