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द्रोण पर्व
अध्याय १६२
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सञ्जय़ उवाच
तत्र नागा हय़ा योधा रथिनोऽथ पदातय़ः |  ३१   क
पारिजातवनानीव व्यरोचन्रुधिरोक्षिताः ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति