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शान्ति पर्व
अध्याय १३९
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विश्वामित्र उवाच
अद्याहमेतद्वृजिनं कर्म कृत्वा; जीवंश्चरिष्यामि महापवित्रम् |  ८२   क
प्रपूतात्मा धर्ममेवाभिपत्स्ये; यदेतय़ोर्गुरु तद्वै व्रवीहि ||  ८२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति