शान्ति पर्व  अध्याय १६३

भीष्म उवाच

स कथञ्चित्ततस्तस्मात्सार्थान्मुक्तो द्विजस्तदा |  ४   क
कान्दिग्भूतो जीवितार्थी प्रदुद्रावोत्तरां दिशम् ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति