वन पर्व  अध्याय १६३

अर्जुन उवाच

स मामपृच्छत्कौन्तेय़ क्वासि गन्ता व्रवीहि मे |  ११   क
तस्मा अवितथं सर्वमव्रुवं कुरुनन्दन ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति