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वन पर्व
अध्याय १६३
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अर्जुन उवाच
तदप्यस्त्रं महातेजाः क्षणेनैव व्यशातय़त् |  ३५   क
व्रह्मास्त्रे तु हते राजन्भय़ं मां महदाविशत् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति