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वन पर्व
अध्याय १६३
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अर्जुन उवाच
पीड्यमानेन वलवत्प्रय़ोज्यं ते धनञ्जय़ |  ५०   क
अस्त्राणां प्रतिघाते च सर्वथैव प्रय़ोजय़ेः ||  ५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति