उद्योग पर्व  अध्याय १६३

भीष्म उवाच

कृपः शारद्वतो राजन्रथय़ूथपय़ूथपः |  २०   क
प्रिय़ान्प्राणान्परित्यज्य प्रधक्ष्यति रिपूंस्तव ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति