उद्योग पर्व  अध्याय ९७

नारद उवाच

अण्डमेतज्जले न्यस्तं दीप्यमानमिव श्रिय़ा |  १७   क
आ प्रजानां निसर्गाद्वै नोद्भिद्यति न सर्पति ||  १७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति