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द्रोण पर्व
अध्याय १६३
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सञ्जय़ उवाच
ततोऽन्तरिक्षे देवाश्च गन्धर्वाश्च सहस्रशः |  ३४   क
ऋषय़ः सिद्धसङ्घाश्च व्यतिष्ठन्त दिदृक्षय़ा ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति