आदि पर्व  अध्याय १६४

वैशम्पाय़न उवाच

स गन्धर्ववचः श्रुत्वा तत्तदा भरतर्षभ |  १   क
अर्जुनः परय़ा प्रीत्या पूर्णचन्द्र इवावभौ ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति