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शान्ति पर्व
अध्याय १६४
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भीष्म उवाच
वह्निं चापि सुसन्दीप्तं मीनांश्चैव सुपीवरान् |  ५   क
स गौतमाय़ातिथय़े न्यवेदय़त काश्यपः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति