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वन पर्व
अध्याय १६४
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अर्जुन उवाच
ततस्तामवसं प्रीतो रजनीं तत्र भारत |  १   क
प्रसादाद्देवदेवस्य त्र्यम्वकस्य महात्मनः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति