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अनुशासन पर्व
अध्याय ५७
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वैशम्पाय़न उवाच
छत्रप्रदानेन गृहं वरिष्ठं; यानं तथोपानहसम्प्रदाने |  ३५   क
वस्त्रप्रदानेन फलं सुरूपं; गन्धप्रदाने सुरभिर्नरः स्यात् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति