शान्ति पर्व  अध्याय ४९

वासुदेव उवाच

सैवमुक्ता महाभागा भर्त्रा सत्यवती तदा |  २०   क
पपात शिरसा तस्मै वेपन्ती चाव्रवीदिदम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति