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वन पर्व
अध्याय १६४
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अर्जुन उवाच
विश्वावसोश्च मे पुत्रश्चित्रसेनोऽभवत्सखा |  ५४   क
स च गान्धर्वमखिलं ग्राहय़ामास मां नृप ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति