उद्योग पर्व  अध्याय १४७

वासुदेव उवाच

य चैनमन्ववर्तन्त भ्रातरो वलदर्पितम् |  ११   क
शशाप तानपि क्रुद्धो यय़ातिस्तनय़ानथ ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति