द्रोण पर्व  अध्याय १६४

सञ्जय़ उवाच

न सूची कपिशो नात्र न गवास्थिर्गजास्थिकः |  १२   क
इषुरासीन्न संश्लिष्टो न पूतिर्न च जिह्मगः ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति