उद्योग पर्व  अध्याय १७८

भीष्म उवाच

गुरुत्वं त्वय़ि सम्प्रेक्ष्य जामदग्न्य पुरातनम् |  २०   क
प्रसादय़े त्वां भगवंस्त्यक्तैषा हि पुरा मय़ा ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति