आदि पर्व  अध्याय ३६

सूत उवाच

स राजा क्रोधमुत्सृज्य व्यथितस्तं तथागतम् |  २०   क
दृष्ट्वा जगाम नगरमृषिस्त्वास्ते तथैव सः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति