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द्रोण पर्व
अध्याय १६४
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सञ्जय़ उवाच
अमृष्यमाणः कर्णस्तु भीमसेनमय़ुध्यत |  ४७   क
विविधैरिषुजालैश्च नानाशस्त्रैश्च संय़ुगे ||  ४७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति