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द्रोण पर्व
अध्याय १६४
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सञ्जय़ उवाच
त्रस्तान्कुन्तीसुतान्दृष्ट्वा द्रोणसाय़कपीडितान् |  ६६   क
मतिमाञ्श्रेय़से युक्तः केशवोऽर्जुनमव्रवीत् ||  ६६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति