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द्रोण पर्व
अध्याय १६४
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सञ्जय़ उवाच
वेदवेदाङ्गविदुषः सत्यधर्मपरस्य च |  ९१   क
व्राह्मणस्य विशेषेण तवैतन्नोपपद्यते ||  ९१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति