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द्रोण पर्व
अध्याय १६४
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सञ्जय़ उवाच
स भवांस्त्रातु नो द्रोणात्सत्याज्ज्याय़ोऽनृतं भवेत् |  ९९   क
अनृतं जीवितस्यार्थे वदन्न स्पृश्यतेऽनृतैः ||  ९९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति