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शान्ति पर्व
अध्याय १६५
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भीष्म उवाच
सुवर्णं रजतं चैव मणीनथ च मौक्तिकम् |  १७   क
वज्रान्महाधनांश्चैव वैडूर्याजिनराङ्कवान् ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति