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शान्ति पर्व
अध्याय १६५
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भीष्म उवाच
क्व ते निवासः कल्याण किङ्गोत्रा व्राह्मणी च ते |  ४   क
तत्त्वं व्रूहि न भीः कार्या विश्रमस्व यथासुखम् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति