शान्ति पर्व  अध्याय १६५

गौतम उवाच

मध्यदेशप्रसूतोऽहं वासो मे शवरालय़े |  ५   क
शूद्रा पुनर्भूर्भार्या मे सत्यमेतद्व्रवीमि ते ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति