शान्ति पर्व  अध्याय ३४७

भीष्म उवाच

न खल्वस्यकृतार्थेन स्त्रीवुद्ध्या मार्दवीकृता |  ४   क
मद्विय़ोगेन सुश्रोणि विय़ुक्ता धर्मसेतुना ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति