menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
chevron_left
chevron_right
कृप उवाच
पाण्डवाः केकय़ा मत्स्याः पाञ्चालाश्च विशेषतः |  १०१   क
सङ्ख्ये द्रोणरथं प्राप्य व्यनशन्कालचोदिताः ||  १०१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति