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द्रोण पर्व
अध्याय १६५
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कृप उवाच
उपसृत्य तदा द्रोणमुच्चैरिदमभाषत |  ११६   क
यस्यार्थे शस्त्रमाधत्से यमवेक्ष्य च जीवसि |  ११६   ख
पुत्रस्ते दय़ितो नित्यं शोऽश्वत्थामा निपातितः ||  ११६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति