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द्रोण पर्व
अध्याय १६५
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सञ्जय़ उवाच
क्रोशमानेऽर्जुने चैव पार्थिवेषु च सर्वशः |  ५२   क
धृष्टद्युम्नोऽवधीद्द्रोणं रथतल्पे नरर्षभम् ||  ५२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति