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द्रोण पर्व
अध्याय १६५
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सञ्जय़ उवाच
पराजय़मथावाप्य परत्र च महद्भय़म् |  ६०   क
उभय़ेनैव ते हीना नाविन्दन्धृतिमात्मनः ||  ६०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति