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अनुशासन पर्व
अध्याय ४३
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देवशर्मो उवाच
ये च ते पुरुषा विप्र अक्षैर्दीव्यन्ति हृष्टवत् |  ५   क
ऋतूंस्तानभिजानीहि ते ते जानन्ति दुष्कृतम् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति