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द्रोण पर्व
अध्याय १६५
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सञ्जय़ उवाच
गजाश्वरथसंय़ुक्तो वृतश्चैव पदातिभिः |  ८२   क
दुर्योधनो महाराज प्राय़ात्तत्र महारथः ||  ८२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति