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वन पर्व
अध्याय २००
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मार्कण्डेय़ उवाच
देवानिष्ट्वा तपस्तप्त्वा कृपणैः पुत्रगृद्धिभिः |  १२   क
दशमासधृता गर्भे जाय़न्ते कुलपांसनाः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति