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द्रोण पर्व
अध्याय १६५
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सञ्जय़ उवाच
द्रवमाणे तथा सैन्ये त्रस्तरूपे हतौजसि |  ८७   क
प्रतिस्रोत इव ग्राहो द्रोणपुत्रः परानिय़ात् ||  ८७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति