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द्रोण पर्व
अध्याय १६५
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सञ्जय़ उवाच
अथ शारद्वतो राजन्नार्तिं गच्छन्पुनः पुनः |  ९७   क
शशंस द्रोणपुत्राय़ यथा द्रोणो निपातितः ||  ९७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति