आदि पर्व  अध्याय १६६

गन्धर्व उवाच

स कदाचिद्वनं राजा मृगय़ां निर्ययौ पुरात् |  २   क
मृगान्विध्यन्वराहांश्च चचार रिपुमर्दनः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति