आदि पर्व  अध्याय १६६

गन्धर्व उवाच

स समुद्रोर्मिवेगेन स्थले न्यस्तो महामुनिः |  ४५   क
जगाम स ततः खिन्नः पुनरेवाश्रमं प्रति ||  ४५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति