आदि पर्व  अध्याय १६६

गन्धर्व उवाच

अमुञ्चन्तं तु पन्थानं तमृषिं नृपसत्तमः |  ७   क
जघान कशय़ा मोहात्तदा राक्षसवन्मुनिम् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति